पीटर नवारो, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार, ने एक बार फिर भारत को निशाने पर लिया है। इस बार उनकी नजर AI तकनीक और ChatGPT जैसी सेवाओं पर है, जिन्हें वे अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे से विदेशों को सब्सिडी देने वाला बता रहे हैं। नवारो का तर्क है कि अमेरिका निवेश और जोखिम उठाता है, लेकिन फायदा भारत-चीन जैसे देश उठाते हैं।
नवारो का AI पर विवादास्पद बयान
एक अमेरिकी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में नवारो ने हैरानी जताई कि ChatGPT जैसी AI सेवाएं अमेरिकी संसाधनों और बिजली पर चलती हैं, फिर भी भारत व चीन इनके सबसे बड़े यूजर क्यों हैं। उन्होंने कहा, “यह समझना मुश्किल है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा विदेशी बाजारों के लिए क्यों खर्च हो रहा है।” उनका सुझाव है कि ऐसी सेवाओं पर अमेरिका को सख्त नीति अपनानी चाहिए।
भारत के खिलाफ नवारो का पुराना इतिहास
नवारो पहली बार भारत पर नहीं भिड़े। उनकी पिछली आलोचनाओं में शामिल हैं:
- ‘Tariff King’ टैग: भारत को अमेरिकी सामानों पर ऊंचे आयात शुल्क लगाने का दोषी ठहराया।
- GSP सुविधा खत्म: 2019 में ट्रंप प्रशासन ने भारत की Generalized System of Preferences हटाई, जिसमें नवारो का बड़ा रोल माना जाता है।
- कोविड सप्लाई चेन: भारतीय फार्मा पर निर्भरता को खतरा बताया, अमेरिका में शिफ्ट की मांग की।
- स्टील-एल्यूमिनियम टैरिफ: भारत पर अमेरिकी टैरिफ का समर्थन किया, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ।
- चीन के साथ तुलना: भारत को एशियाई देशों में गिनकर अमेरिका-विरोधी व्यापार नीतियों का आरोप लगाया।
ट्रंप 2.0 में संभावित असर
ट्रंप की 2025 में वापसी के बाद नवारो जैसे हawks की सलाह से US-India व्यापार संबंधों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत को AI और टेक सेक्टर में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का नया चैप्टर है।

