पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने मतदाता सूची में भारी अनियमितताएं उजागर की हैं। सुप्रीम कोर्ट को दाखिल हलफनामे में चुनाव आयोग ने बताया कि आसनसोल जिले की बाराबनी विधानसभा (283) में एक व्यक्ति को 389 मतदाताओं का पिता दर्ज किया गया है, जबकि हावड़ा की बाली सीट (169) पर दूसरे व्यक्ति के नाम पर 310 बच्चे दिखाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के समक्ष वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने पेशी के दौरान इन्हें ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ बताया। कोर्ट ने ईसीआई को निर्देश दिए कि ऐसी सूचियां ग्राम पंचायत, ब्लॉक और वार्ड कार्यालयों पर चस्पा करें, तथा 10 दिनों में आपत्तियां दर्ज करने की अनुमति दें।
अन्य चौंकाने वाले आंकड़े
राज्य में 7 व्यक्ति 100 से अधिक मतदाताओं के माता-पिता हैं, 10 को 50+, 10 को 40+, 14 को 30+, 50 को 20+ के पिता बताया गया। इसके अलावा 8,682 को 10+, 2,06,056 को 6+, 4,59,054 को 5+ बच्चों का अभिभावक दर्ज है, जबकि NFHS 2019-21 के अनुसार भारत में औसत परिवार आकार 4.4 है। कुल 1.25 करोड़ नामों पर विसंगतियां हैं, जिनमें नाम मिसमैच, उम्र अंतर (15 साल से कम या 50+), दादा-दादी से 40 साल कम अंतर शामिल।
सुधार प्रक्रिया
प्रभावित मतदाताओं को नोटिस जारी हो चुके हैं, दस्तावेज जमा करने का मौका मिलेगा। कोर्ट ने क्लास 10 एडमिट कार्ड को वैध प्रमाण मानने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के आदेश दिए, साथ ही डीजीपी को कानून-व्यवस्था बनाए रखने को कहा। यह अभियान मतदाता सूची को शुद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

