प्रयागराज के माघ मेला में मौनी अमावस्या (19 जनवरी 2026) पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के संगम स्नान को रोकने से विवाद भड़क गया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासन पर मारपीट, साजिश और अपमान का आरोप लगाते हुए हिंदुओं को ‘कायर’ कहा, जबकि मुसलमानों की तारीफ की। धरना दूसरे दिन भी जारी है, मेला प्रशासन ने बैरिकेड तोड़ने का खंडन किया।
शिविर से पालकी में संगम की ओर बढ़े शंकराचार्य को पुलिस ने रोका, पैदल स्नान का प्रस्ताव ठुकराया। शिष्यों पर लाठीचार्ज, बाल खींचना, जूते से पीटने के आरोप; 15 घायल, 3 भर्ती। उन्होंने खून से सना दुपट्टा दिखाया और कहा- ‘रावण भी दया करता, नेपाल के संत को चोटी पकड़कर मारा’।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीएम मनीष कुमार वर्मा, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, गृह सचिव मोहित गुप्ता, पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार को नाम लिया; ‘झूठे बयान, गुंडागर्दी’। पालकी उतारकर भगदड़ मचाने की साजिश का दावा, ‘मेरी हत्या कर पानीपत जैसी हार दोहराना चाहते थे’। मेला अधिकारी ऋषिराज ने कहा- वाहन प्रतिबंधित, भगदड़ रोकने के लिए हस्तक्षेप; सीसीटीवी जांच जारी।
‘हिंदू कायर हैं जो गौ हत्या पर नहीं निकलते; ज्ञानवापी पर 3 ईंटें गिरने से 10 हजार मुसलमान जुटे- धन्य वे!’। योगी पर ‘मंदिर तोड़ने वाला’, बीजेपी पर गौ रक्षा न करने का आरोप; 11 मार्च दिल्ली में संत सम्मेलन का ऐलान। ज्योतिषपीठ पद पर विवाद को खारिज- अन्य शंकराचार्यों की स्वीकृति का दावा।
माघी पूर्णिमा तक पालकी पर धरना, शिविर में लौटेंगे नहीं जब तक प्रोटोकॉल न बने। लीगल सेल हाईकोर्ट जा सकती; विरोध में कंप्यूटर बाबा जैसे संत, कांग्रेस नेता पहुंचे। मेला प्रशासन का कहना- सभी संतों ने स्नान किया, कोई अपमान नहीं।

