📰 अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक नया दंड संहिता (क्रिमिनल कोड) लागू किया है, जिसने घरेलू हिंसा से जुड़े नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। इस नियम के अनुसार अब पति अपनी पत्नी और बच्चों को शारीरिक रूप से मार सकता है, जब तक कि उनकी हड्डियाँ न टूटें और खुले घाव न हों।
📌 क्या है यह ‘खौफनाक’ कानून?
- तालिबान के नए दंड संहिता के Article 32 में कहा गया है कि पति को पत्नी या बच्चों को पीटने की अनुमति है, बशर्ते कि चोटें गंभीर न हों (हड्डी न टूटे/खुला घाव न हो)।
- अगर हड्डी टूट जाती है या गंभीर चोट होती है, तो अधिकतम केवल 15 दिनों की जेल की सज़ा दी जा सकती है — यह भी तभी जब महिला अपने घाव अदालत में साबित कर पाए।
📌 महिलाओं के खिलाफ अन्य प्रतिबंध
➡️ महिलाओं को अपना घर (मायका) जाने के लिए पति की अनुमति लेना अनिवार्य है। यदि वे बिना अनुमति कहीं जाती हैं, तो उन्हें तीन महीने तक जेल भी हो सकती है।
➡️ महिलाएं अदालत में शिकायत करने के लिए तैयार होने पर भी पुरे ढके हुए कपड़े में और एक पुरुष संरक्षक के साथ मौजूद रहनी होंगी — अक्सर वही व्यक्ति जो उन पर जुल्म कर रहा हो।
🌍 क्यों यह दुनिया भर में विवादित?
यह कानून अफ़ग़ान महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है।
- मानवाधिकार संगठनों ने इसे घरेलू हिंसा को वैध मानने वाला कानून बताया है।
- कई देशों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कदम की प्रशंसा नहीं की, बल्कि इसे मानवाधिकारों का बड़ा उल्लंघन बताया।
📌 प्रतिक्रिया और आलोचना
🎤 भारत के मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने भी इस कानून पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और धार्मिक नेतृत्व से इसके खिलाफ खुल कर बोलने की अपील की है।
