🔹 Surya Kant की अध्यक्षता वाली बेंच ने पश्चिम बंगाल में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) — मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया से जुड़ी सुनवाई के बीच कोर्ट रूम में सख्त टिप्पणी की है।
🔹 सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील Kapil Sibal ने दिवंगत Abhishek Manu Singhvi के साथ बहस करते हुए पुलिस-प्रशासन और SIR प्रक्रिया के बारे में कई दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने दलीलों के बीच कहा कि “लॉ और ऑर्डर बिगड़ने की चेतावनी देना पर्याप्त नहीं है, आपको दस्तावेज़-आधारित दलीलें देना होंगी” जैसे शब्दों से सख्ती जताई।
🔹 कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची सुधार का लक्ष्य चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाना है, और इसे अवरोधों के बीच आगे बढ़ाना भी ज़रूरी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि भावनात्मक बयान और राजनीतिक टिप्पणियाँ मुद्दे का समाधान नहीं कर सकतीं।
🔹 यह मामला पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में सही-गलत नाम हटाने/शामिल करने की याचिकाओं से जुड़ा है, जहां चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच ‘लॉ एंड ऑर्डर’ पर प्रश्न उठे हैं। कोर्ट ने वकीलों को भी यह याद दिलाया कि न्यायिक मंच पर दलीलें तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए न कि केवल धमकियों पर।
📌 क्या हो रहा है SIR में?
• सर्टिफाईड वोटर्स की सूची पर “तार्किक विसंगतियाँ” वाले लोगों के दावों/आपत्तियों पर निर्णय रुका हुआ है।
• सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद के चलते हाई कोर्ट को निर्देश दिए हैं कि वह न्यायिक अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तैनात करे ताकि दावों/आपत्तियों का न्यायिक ढंग से निपटान हो सके।

