गलगोटिया यूनिवर्सिटी रोबो-डॉग विवाद — क्या हुआ?

गलगोटिया यूनिवर्सिटी रोबो-डॉग विवाद — क्या हुआ?

🔹 विवाद की शुरुआत

  • Galgotias University की प्रोफेसर नेहा सिंह ने India AI Impact Summit 2026 में एक रोबोटिक डॉग को “ओरियन” नाम देकर यह दावा किया कि यह उनके यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित किया गया है
  • वीडियो क्लिप में उन्होंने बताया कि यह रोबोट स्वतंत्र रूप से घूम सकता है और निगरानी, मॉनिटरिंग कर सकता है — जिससे यह प्रशिक्षित और उन्नत तकनीक प्रतीत होती थी।

🔹 सोशल मीडिया और जांच

  • इंटरनेट यूज़र्स और AI विशेषज्ञों ने जल्दी ही पहचाना कि यह रोबोट चीन की कंपनी Unitree Robotics का Unitree Go2 मॉडल है — एक कमर्शियल रूप से बिकने वाला रोबोट
  • जैसे ही यह वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और आलोचना बढ़ी और इसे “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” कहा गया।

📌 केंद्र और यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया

📍 यूनिवर्सिटी का बयान

  • यूनिवर्सिटी ने कहा कि नेहा सिंह को प्रेस से बात करने का अधिकार नहीं था, और वे “photo-op के उत्साह में” गलत जानकारी दे बैठीं।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि वे रोबोट को स्वयं नहीं बनाते और न ही ऐसा दावा करते हैं; यह एक शिक्षण उपकरण है जो छात्रों को AI तथा रोबोटिक्स का अनुभव देने के लिए लिया गया है।

📍 AI Summit से हटाया गया स्टाल

  • विवाद बढ़ने के बाद भवत मंडपम में यूनिवर्सिटी का स्टॉल खाली कर दिया गया और आयोजकों ने उन्हें समिट स्थल से हटने का निर्देश दिया।

📍 केंद्र सरकार की टिप्पणी

  • केंद्र ने कहा है कि मिस-इन्फ़ॉर्मेशन को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए और वास्तविक नवाचार को ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

🔥 अब नेहा सिंह का लिंक्डइन अकाउंट गायब

  • विवाद के बाद से नेहा सिंह का LinkedIn प्रोफाइल 404 एरर दिखा रहा है, यानी वह अब उपलब्ध नहीं है — इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रोफाइल डिलीट या डिसएबल्ड कर दिया गया है।
  • इससे पहले उनके प्रोफाइल पर “Open to Work” टैग भी दिखा था, जिससे यह अफ़वाहें भी फैल गई थीं कि उन्हें नौकरी से निकाला गया है, हालांकि यूनिवर्सिटी ने कहा है कि उन्हें निलंबित नहीं किया गया है और जांच जारी है।

🧠 वादा और विवाद के असर

✔️ यूनिवर्सिटी का कहना:

  • गलती “गलत जानकारी” और संचार की चूक थी, जानबूझकर भ्रामक दावे नहीं किए गए।

❌ आलोचक कहते हैं:

  • यह प्रतिष्ठान की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है और छात्रों तथा शोध की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है।

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