🔍 नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें मांग की जा रही थी कि देश भर में किसी भी मस्जिद के निर्माण या नामकरण पर रोक लगाई जाए अगर वह बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम से हो।
📌 क्या थी याचिका?
- याचिकाकर्ता ने दलील दी कि मुगल सम्राट बाबर को भारत पर आक्रांता माना जाता है और उनके नाम पर किसी भी मस्जिद का निर्माण या नामकरण देश की भावना के विपरीत है।
- मांग थी कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएँ कि वे ऐसे मस्जिदों के निर्माण या नामकरण की अनुमति न दें।
⚖️ क्या फैसला आया?
- सुप्रीम कोर्ट की बेंच — जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे — ने कहा कि याचिका को सुनवाई के लिए भी स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- कोर्ट की असंवेदनशीलता के बीच, याचिकाकर्ता ने खुद ही याचिका वापस ले ली और मामला खारिज कर दिया गया।
📌 पृष्ठभूमि और विवाद
- यह याचिका उस विवाद के बीच में आई है जिसमें पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम से एक मस्जिद की पुनर्निर्माण योजना पर राजनीतिक और सामाजिक बहस बढ़ी हुई है। वहाँ एक पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक ने इसके लिए शिलान्यास किया था, जिससे बहस और तेज़ हुई।
🧠 न्यायालय की सोच
- अदालत ने यह संकेत दिया कि ऐसे व्यापक प्रतिबंधों की मांग को किसी विशेष संवैधानिक या वैधानिक उल्लंघन के आधार पर नहीं जोड़ा गया है, इसलिए इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
- कोर्ट ने इतिहास या विचारधारा-आधारित दलीलों के आधार पर सामान्य प्रतिबंध नहीं जारी किया।
📍 संक्षेप:
सुप्रीम कोर्ट ने आज देशभर में बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम से किसी भी मस्जिद के निर्माण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। इसके साथ यह स्पष्ट हुआ कि ऐसे सामान्य प्रतिबंध न्यायालय के लिए उचित आधार नहीं बनते हैं जब तक उन्हें संविधान या कानून में खरोंच न लगाया जा सके।

