भारत में “किराए के नए नियम 2026” के नाम से जो बदलाव चर्चा में हैं, उनका फोकस रेंट एग्रीमेंट को डिजिटल/रजिस्टर्ड, सिक्योरिटी डिपॉजिट को सीमित और विवाद-निपटान को ज्यादा व्यवस्थित बनाना है। कई राज्यों में ये बदलाव Model Tenancy Act (2021) जैसे फ्रेमवर्क को अपनाने/लागू करने से जुड़े हैं, इसलिए नियम राज्य के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकते हैं।
किराए के नए नियम 2026
2026 में लागू/फॉलो किए जा रहे फ्रेमवर्क के तहत रेंट एग्रीमेंट को लिखित रखना और तय समय के भीतर ऑनलाइन/डिजिटल तरीके से रजिस्ट्रेशन की दिशा में जोर बढ़ा है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक एग्रीमेंट को 60 दिनों के भीतर रजिस्टर कराने की बात कही गई है, और न कराने पर पेनल्टी/कानूनी वैलिडिटी पर असर की चेतावनी भी दी जाती है (राज्य अनुसार नियम बदल सकते हैं)।
सिक्योरिटी डिपॉजिट लिमिट
टेनेंट्स के लिए सबसे बड़ा राहत वाला पॉइंट सिक्योरिटी डिपॉजिट पर कैप माना जा रहा है—रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में आम तौर पर 2 महीने तक और कमर्शियल में 6 महीने तक। इस बदलाव से बड़े शहरों में 6–10 महीने के भारी-भरकम डिपॉजिट की प्रैक्टिस पर रोक/कमी का लक्ष्य रखा गया है।
| नियम | टेनेंट बेनिफिट | लैंडलॉर्ड रूल |
|---|---|---|
| डिपॉजिट | 2 महीने कैप | रिफंड 30 दिन |
| रजिस्ट्रेशन | 60 दिन ऑनलाइन | पेनल्टी ₹5K |
| हाइक | सालाना नोटिस | 5-10% मैक्स |
| विवाद | 60 दिन कोर्ट | नो सेल्फ हेल्प |
किराया बढ़ाने और खाली कराने के नियम
रेंट बढ़ोतरी को एग्रीमेंट में लिखे एस्केलेशन/टर्म्स और नोटिस-प्रोसेस के साथ जोड़ने पर जोर है ताकि अचानक किराया न बढ़े। Model Tenancy Act के अनुसार तय अवधि खत्म होने के बाद अगर किरायेदार नहीं निकलता, तो कुछ समय के लिए दोगुना और फिर चार गुना तक “एन्हांस्ड रेंट”/पेनल्टी जैसा प्रावधान भी बताया गया है।
विवाद और शिकायत का सिस्टम
Model Tenancy Act में 3-टियर सिस्टम (Rent Authority, Rent Court, Rent Tribunal) के जरिए विवाद जल्दी सुलझाने की व्यवस्था का ब्लूप्रिंट दिया गया है। इसी फ्रेमवर्क का उद्देश्य यह भी है कि एग्रीमेंट, पेमेंट, मेंटेनेंस, एंट्री/इंस्पेक्शन जैसी चीजें लिखित रहें ताकि बाद में झगड़े कम हों।


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